आर.वी. कनोरिया ने संभाला फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का अध्यक्ष पद

कनोरिया केमिकल्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर.वी. कनोरिया ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का अध्यक्ष पद सम्भाल लिया। पहले इस पद पर मारिको के अध्यक्ष हर्ष मारीवाला थे।

कनोरिया ने फिक्की अध्यक्ष के रूप में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए गुरुवार को कहा, “हमारा ध्यान राज्यों की गतिविधियों पर अधिक होगा और हम उन नीतियों पर अधिक गौर करेंगे, जिनका देशव्यापी असर हो। इस दृष्टि से १८-०१-२०१२ को  वार्षिक आम बैठक में शुरू की गई भारत सशक्तीकरण परियोजना को तार्किक मुकाम पर पहुंचाया जाएगा।”

कनोरिया करीब तीन दशकों से रसायनों, कपड़े और जूट कारोबार से जुड़े हैं। वह आईएमडी, स्विट्जरलैंड से एमबीए हैं।

एचएसबीसी इंडिया की राष्ट्रीय प्रमुख नैना लाल किदवई को फिक्की की वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया, जबकि एक्सप्रो इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला उपाध्यक्ष चुने गए।

पंकज पचौरी बने प्रधानमंत्री के नए मीडिया सलाहकार

19 जनवरी  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार हरीश खरे प्रधानमंत्री कार्यालय में दो वर्षों से ज्यादा समय तक सेवा देने के बाद आज सेवानिवृत्त हो गये। टेलीविजन पत्रकार पंकज पचौरी के पीएमओ में संचार सलाहकार नियुक्त होने के कुछ घंटे बाद ही खरे :65: ने इस्तीफा दे दिया । वह प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पुलोक चटर्जी को अपनी रिपोर्ट देंगे ।
जून 2009 में प्रधानमंत्री कार्यालय में सेवा देने से पहले खरे ‘द हिंदू’ अखबार में नयी दिल्ली में वरिष्ठ सह संपादक और ब्यूरो प्रमुख थे । उससे पहले वे अहमदाबाद में टाइम्स आॅफ इंडिया में स्थानीय संपादक थे ।
मीडिया सलाहकार के तौर पर वह भारत सरकार में सचिव पद पर तैनात थे ।
पचौरी एनडीटीवी इंडिया में प्रबंध संपादक थे और वह पीएमओ को प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया पर रणनीति के बारे में सलाह देंगे। पचौरी :48: इससे पहले ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन :बीबीसी: लंदन में काम कर चुके हैं । इसके अलावा वह इंडिया टुडे में भी काम कर चुके हैं ।

भारत के मशहूर पेंटर मक़बूल फ़िदा हुसैन का निधन

भारत के मशहूर पेंटर मक़बूल फ़िदा हुसैन का निधन हो गया है. गुरुवार, ९ जून २०११ को  तड़के लंदन के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया.

अपनी कई पेंटिंग्स के कारण विवादों में रहे एमएफ़ हुसैन 95 वर्ष के थे.

मक़बूल फ़िदा हुसैन का जन्म महाराष्ट्र के पंढ़रपुर में 17 सितंबर 1915 को हुआ था.

वर्ष 2006 से ही वे भारत से चले गए थे. हिंदू देवी-देवताओं की विवादित पेंटिग्स के कारण हिंदू संगठनों ने उन्हें धमकी दी थी.

फ़ोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें भारत का पिकासो की पदवी दी थी. वर्ष 1996 में हिंदू देवी-देवताओं की नग्न पेंटिग्स को लेकर काफ़ी विवाद हुआ.

कई कट्टरपंथी संगठनों ने तोड़-फोड़ की और एमएफ़ हुसैन को धमकी भी मिली. पिछले साल जनवरी में उन्हें क़तर ने नागरिकता देने की पेशकश की, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था.

हिंदी फ़िल्मों की मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के बड़े प्रशंसक एमएफ़ हुसैन ने उन्हें लेकर गज गामिनी नाम की फ़िल्म भी बनाई थी.

इसके अलावा उन्होंने तब्बू के साथ एक फ़िल्म मीनाक्षी: अ टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़ बनाई थी. इस फ़िल्म के एक गाने को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस फ़िल्म पर आपत्ति जताई थी.

एमएफ़ हुसैन को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान 1940 के दशक के आख़िर में मिली. वर्ष 1947 में वे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप में शामिल हुए.
एमएफ़ हुसैन

एमएफ़ हुसैन वर्ष 2006 से भारत से बाहर रह रहे थे

युवा पेंटर के रूप में एमएफ़ हुसैन बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट्स की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर कुछ नया करना चाहते थे. वर्ष 1952 में उनकी पेंटिग्स की प्रदर्शनी ज़्यूरिख में लगी.

उसके बाद तो यूरोप और अमरीका में उनकी पेंटिग्स की ज़ोर-शोर से चर्चा शुरू हो गई. वर्ष 1955 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया.

वर्ष 1967 में उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म थ्रू द आइज़ ऑफ़ अ पेंटर बनाई. ये फ़िल्म बर्लिन फ़िल्म समारोह में दिखाई गई और फ़िल्म ने गोल्डन बेयर पुरस्कार जीता.

वर्ष 1971 में साओ पावलो समारोह में उन्हें पाबलो पिकासो के साथ विशेष निमंत्रण देकर बुलाया गया था. 1973 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया तो वर्ष 1986 में उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया गया.

भारत सरकार ने वर्ष 1991 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. 92 वर्ष की उम्र में उन्हें केरल सरकार ने राजा रवि वर्मा पुरस्कार दिया.

क्रिस्टीज़ ऑक्शन में उनकी एक पेंटिंग 20 लाख अमरीकी डॉलर में बिकी. इसके साथ ही वे भारत के सबसे महंगे पेंटर बन गए थे. उनकी आत्मकथा पर एक फ़िल्म भी बन रही है.

खरीफ सीजन की फसलों की खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमसपी) घोषित

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की फसलों की खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमसपी) घोषित कर दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की केबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने गुरुवार को धान के समर्थन मूल्य में 80 रुपये की बढ़ोतरी की है। नए सीजन के लिए धान (सामान्य) का भाव 1,080 रुपये और ग्रेड ए धान का 1,110 रुपये प्रति क्विंटल होगा। पिछले साल धान का एमएसपी क्रमश: 1,000 और 1,030 रुपये प्रति क्विंटल था। दालों के एमएसपी में 6.6 से 13.7 फीसदी और तिलहनों के एमएसपी में 17.2 से 19.1 फीसदी की बढ़ोतरी की है। मोटे अनाजों मक्का, बाजार और ज्वार के एमएसपी में 11.3 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। किसानों को दलहन और तिलहन उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए खरीफ सीजन के खरीद मूल्य नीति में इसी पर ज्यादा ध्यान दिया है।

बीपीएल के लिए पेंशन की आयुसीमा घटाई

बीपीएल के लिए पेंशन की आयुसीमा घटाई

कैबिनेट ने गरीबी रेखा से नीचे रह रहे और अस्सी वर्ष से अधिक आयु वालों की पेंशन 200 से बढ़ाकर 500 रुपए कर दी है.

गरीबी की रेखा से नीचे रह रहे क़रीब 72 लाख लोगों को लाभ देते हुए केंद्र सरकार ने बुज़ुर्गों की पेंशन के लिए आयुसीमा 65 साल से घटाकर 60 साल कर दी है.

इंदि‍रा गांधी राष्‍ट्रीय वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के तहत लाभान्‍वि‍तों की आयुसीमा कम करने का फ़ैसला केंद्रीय कैबिनेट ने लिया है.

इसके अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 80 वर्ष और उससे अधि‍क आयु वाले वृद्धों को प्राप्‍त होने वाली पेंशन की दर में भी वृद्धि करने को मंजूरी दी गई है.

अब 80 वर्ष या उससे अधि‍क आयु के वृद्धों को 500 रुपये प्रति‍ माह दिए जाएंगे. पहले ये दर 200 रुपए मासिक थी.

आयु सीमा कम करने के कारण योजना का लाभ अब 60 से 64 वर्ष आयु वर्ग के 72.32 लाख वृद्धों को मि‍लेगा जो गरीबी की रेखा के नीचे हैं. एक आकलन के अनुसार 80 वर्ष की आयु से अधि‍क के 26.49 लाख वृद्धों को 500 रुपये प्रति‍ माह की केंद्रीय सहायता प्राप्‍त होगी.

ये परिवर्तन इस वर्ष एक अप्रैल से लागू समझे जाएंगे.

भारत सरकार ने एक बयान जारी कर कहा है, “आयु सीमा कम करने के कारण योजना का लाभ अब 60 64 वर्ष आयु वर्ग के 72.32 लाख वृद्धों को मि‍लेगा जो गरीबी की रेखा के नीचे हैं. एक आकलन के अनुसार 80 वर्ष की आयु से अधि‍क के 26.49 लाख वृद्धों को 500 रुपये प्रति‍ माह की केंद्रीय सहायता प्राप्‍त होगी.”

सरकारी बयान के अनुसार इस समय 65 वर्ष के ऊपर के 169 लाख वृद्ध हैं जो गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं और जि‍न्‍हें योजना के अंतर्गत केंद्रीय सहायता प्राप्‍त हो रही है.

सरकारी बयान के अनुसार इन परिवर्तनों के  चलते सरकारी खजाने पर 2,770 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा.

सिंगूर में टाटा मोटर्स के संयंत्र के लिए किसानों से अधिग्रहीत की गई 400 एकड़ भूमि उन्हें लौटाने संबंधी अध्यादेश जारी

कोलकाता.  पश्चिम बंगाल सरकार ने सिंगूर में टाटा मोटर्स के संयंत्र के लिए किसानों से अधिग्रहीत की गई 400 एकड़ भूमि उन्हें लौटाने संबंधी अध्यादेश जारी कर दिया है। राज्यपाल एमके नारायणन ने इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए इसे सिंगूर के लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश को राज्य विधानसभा के आगामी सत्र में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

सिंगूर में अनिच्छुक किसानों की जमीन वापसी की मांग को लेकर पिछली वाम सरकार के कार्यकाल में 26 दिन तक अनशन पर बैठने वाली ममता ने इस अध्यादेश के जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘संयंत्र की शेष 600 एकड़ भूमि उद्योग के लिए खुली रखी गई है। टाटा समूह चाहे तो यहां संयंत्र लगा सकता है। लेकिन यदि वह यहां संयंत्र नहीं लगाकर मुआवजे की मांग करता है, तो राज्य सरकार आर्ब्रिटेटर नियुक्त कर कानूनी तरीके से उसे मुआवजा देगी।’

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने गत 20 मई को सत्ता में आने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में सिंगुर में टाटा मोटर्स की स्थगित परियोजना की 400 एकड़ जमीन किसानों को लौटाने का फैसला लि

भ्रष्टाचार मिटाने की इस मुहीम में आपका योगदान

              पूरा देश इस बहस में उलझा हुआ है कि सरकार द्वारा किया गया कार्य उचित था या अनुचित. बाबा सही हैं या गलत? मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं और जिन समस्याओं को लेकर बाबा रामदेव ने या फिर अन्ना हजारे ने आन्दोलन शुरू किया वह पीछे छूटता जा रहा है. ऑनलाइन टिप्पणीकार मर्यादाओं को तोड़ गाली-गलौज में पड़े हैं. बड़ा दुःख होता है जब लोग ओछी भाषाओँ का इस्तेमाल करते है और अपने आपको बाबा का अनुयायी कहते हैं. बगैर गाली दिए आप अपना समर्थन दे सकते हैं. अपनी शक्ति का अहसास दिलाने के लिए गाली एक माध्यम बिलकुल नहीं हो सकती. पिछले कई दिनों से नेट पर आँखे गडाए बैठा हूँ पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कोई ठोस योजना कोई नहीं सुझा रहा.बस एक दूसरे कि निंदा करने में लगे है.

            यह सच है कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक लम्बी लड़ाई कि जरुरत है. और इस लड़ाई में हर किसी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक मुहीम की जरुरत है. एक ऐसे संगठन की जो सरकार की गलत नितियों को आम जनता तक पहुंचाए. और सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं और भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिनके लिए लोगो को आगे आने की जरुरत है. कन्या भ्रूण हत्या, बल विवाह, दहेज़ प्रथा, जातिवाद, सम्प्रदायवाद और न जाने ऐसे कितने ही मुद्दे हैं जो देश को खोखला बनाते हैं. इन सबके के लिए लड़ने की जरुरत है. जिन नेताओ को हम चुनते है वही हमारे साथ धोखा करते हैं. सपष्ट है कि कहीं न कहीं हम चुनने में ही भूल करते है. जाति देख कर वोट करते हैं, पैसे लेकर वोट करते हैं या फिर चुनाव के समय भाई – भतीजावाद के शिकार हो जाते हैं. दुष्परिणाम सामने है. हम हर पल इन नेताओ के द्वारा ठगे जाते हैं. हमारी बोली बंद करने के लिए क्रूर दमन चक्र चलने से भी नहीं चुकती है हमारी चुनी हुई सरकार. इसकी सपष्ट वज़ह है कि हम खुद भ्रष्ट हो गए है या फिर अपनी आखों को मूंद भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं.

       नेट का इस्तेमाल करनेवाले जितने भी लोग हैं वो इस मुहीम में अपना अहम् योगदान दे सकते हैं.मैं इस उम्मीद के साथ इन शब्दों को लेकर आप लोगों के सामने उपस्थित हुआ हूँ कि राजनीति से दूर बिलकुल निष्पक्ष हो कर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर और भ्रष्टाचार को दूर करने के उपायों पर सुझाव प्रेषित करेंगे और सभी एकजुट होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करेंगे . यह प्रण करें कि किसी भी प्रकार के भ्रष्ट आचरण से अपने को दूर रखें. यह भर्ष्टाचार मिटाने की मुहीम में लगे लोगो को आपका सबसे बड़ा योगदान होगा.